PM Formalization of Micro Food Processing
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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकरण योजना (PM-FME)
अधिकारिता और उद्देश्य:
- PM-FME योजना का उद्देश्य देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देना और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
- यह योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
लाभार्थियों की संख्या:
- 31 अक्टूबर 2025 तक:
- 1,363 स्वयं सहायता समूह (SHGs)
- 236 किसान उत्पादक संगठन (FPOs)
- 1,61,072 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी के लिए ऋण स्वीकृत।
- 31 अक्टूबर 2025 तक:
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पहल:
- मुख्य उद्देश्य: सभी जिलों में एक उत्पाद का चयन, ब्रांडिंग, और प्रचार करना।
- कुल 726 जिलों से GI-टैग वाले उत्पादों सहित ODOP को मंजूरी दी गई है।
- यह पहल संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करती है।
आर्थिक सहायता:
- सूक्ष्म उद्यमों के लिए:
- सदस्यानुसार श्रेणी में: 35% क्रेडिट लिंक्ड पूंजी सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति इकाई।
- SHG के सदस्य को 40,000 रुपये की बीज पूंजी, अधिकतम 4 लाख रुपये तक।
- सामान्य बुनियादी ढांचे के लिए:
- एफपीओ, SHGs, सहकारिताओं को 35% क्रेडिट लिंक्ड पूंजी सब्सिडी, अधिकतम 3 करोड़ रुपये तक।
- Branding और Marketing के लिए: एफपीओ/SHGs के समूहों को 50% तक का अनुदान।
- सूक्ष्म उद्यमों के लिए:
विकास पहल और लक्ष्य:
- खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए:
- फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना।
- प्रोसेसिंग एफिसिएंसी को बढ़ाना।
- कृषि खाद्य उत्पादों की शेल्फ़ लाइफ को बढ़ाना।
- रोजगार सृजन के लिए:
- स्थानीय रोजगार को सृजन करना, विशेषकर FPOs और SHGs के माध्यम से।
- खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए:
प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण:
- योजना में उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) शामिल है, जो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण और कौशल विकास पर केंद्रित है।
संविधानिक संदर्भ:
- योजना का कार्यान्वयन और प्रोत्साहन भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSPs) का पालन करता है, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के उद्देश्य की पूर्ति के लिए है।
सामान्य विवरण:
- PM-FME योजना ग्रामीण आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा, और वैल्यू चेन को मज़बूत करने के लिए प्रेरक का कार्य करती है।
- यह योजना नीति और विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
समापन:
योजना के तहत दी गई आर्थिक सहायता, विकास कार्यक्रम और ODOP पहल जैसे उपाय सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को न केवल औपचारिक बनाते हैं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Key Terms & Concepts
| PM-FME Scheme | Supports micro food enterprises |
| MoFPI | Ministry overseeing food processing |
| October 31, 2025 | Deadline for approved loans |
| 1363 SHGs | Self-help groups approved for loans |
| 236 FPOs | Farmer Producer Organizations approved |
| 1,61,072 micro food enterprises | Approved for credit linked subsidy |
| One District One Product (ODOP) | Promotes regional product development |
| 35 states/UTs | Participants in ODOP initiative |
| 726 districts | Districts approved under ODOP |
| 35% | Subsidy for micro enterprises |
| ₹10 lakh | Max subsidy per unit |
| ₹40,000 | Seed capital for SHG members |
| 3 crore | Max support for infrastructure |
| 50% | Grant for branding and marketing |
| Entrepreneurship Development Program (EDP) | Training program for enterprises |




